अब निर्णय तुम्हारा है

एक नीड़ ख्वाबों, ख्यालों और ख्वाहिशों का मेरी ये रचना भारत की उन स्त्रियों के लिए है जो बस बिटियाँ है, बांके की दुल्हन हैं, छुट्टन की अम्मा है। कहीं बडकी, मझली, छुटकी है उनके पास खुद का नाम नहीं, कोई पहचान ही नहीं, विरोध उसका स्वभाव ही नहीं, जो कुछ परिवार, समाज से मिला उसको भाग्य मान बैठी (मौन... [पूरी पोस्ट]
writer Priya
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[20 Mar 2010 02:26 AM]

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