राजस्थान पत्रिका के एक लेख पर प्रतिक्रिया स्वरूप

जाते-जाते... आरक्षण के विकल्प : कितने सही कितने ग़लत विनय भार्गव का लेख ‘आरक्षण के विकल्प और भी’ पढ़ा। इसमें लेखक ने आरक्षण के कुछ विकल्प सुझाए हैं। लेकिन साथ ही लेखक ने अपनी कुछ चिंताएं भी जाहिर की हैं। उनकी इस चिंता पर चिंता होती है कि वह इतनी व्यर्थ चिंता क्यों कर... [पूरी पोस्ट]
writer vikas vashisth
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[20 Mar 2010 01:55 AM]

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