अस्त हो गया हिंदी साहित्य का मार्कन्डे नाम का सूरज....

विचारों का दर्पण हिंदी साहित्य में नई कहानियों के आन्दोलन का बुनियादी लेखक मारकंडे जी अब हमारे बीच नहीं रहे। 1955 में उन्होंने '' हंसा जाई अकेला'' नामक कहानी से हिंदी साहित्य में नई कहानियो को नया रूप दिया। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी इटावा में जन्मे मारकंडे जी के जीवन का... [पूरी पोस्ट]
writer देवेश प्रताप
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[19 Mar 2010 21:38 PM]

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