ये चांद की बातें, वो रफ़ाक़त की कहानी
हर बात यहां ख़्वाब दिखाने के लिए हैतस्वीर हकीक़त की छुपाने के लिए हैमहके हुए फूलों में मुहब्बत है किसी कीये बात महज़ उनको बताने के लिए हैचाहत के उजालों में रहे हम भी अकेलेबस साथ निभाना तो निभाने के लिए हैमाज़ी के जज़ीरे का मुक़द्दर है अंधेरागुज़रा हुआ लम्हा...
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फ़िरदौस ख़ान
ग़ज़ल
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[19 Mar 2010 21:09 PM]



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