एक “टिप्पणी” जो किसी “पोस्ट” से कम नहीं थी
अभी हिंदी ब्लॉग जगत में “अश्लील विज्ञापनों के खिलाफ” एक जोरदार बहस चल रही है, शुरुआत अनिल पुसदकर ने की और उस कई प्रतिक्रियाएं आयीं, जिन्हें मैंने अपनी पिछली पोस्ट में संकलित किया, उसके बाद ये ही चर्चा कई और ब्लोगों पर देखी गयी | विषय सही है, बहस सार्थक...
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राहुल प्रताप सिंह राठौड़
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[19 Mar 2010 19:43 PM]



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