नेता तुम लूट लो............

साहित्य योग आम आदमी की आस बड़े वादों का झूठा विस्वास भावनाओ का ब्रत उपवास लूट लो दोनों हाथों से लूट लो नेता तुम लूट लो............चुनाव आते हैं  बार-बार  नयी आस और उम्मीद के साथ कर दिए जाते हैं फिर वही वादे जिनपर इरादे थे... [पूरी पोस्ट]
writer Tej Pratap Singh
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[19 Mar 2010 18:59 PM]

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