मेरे रंग....

mahua लड़की बड़ी ही बेकल...पूरे चांद की रात...फागुन का महीना और उसका साथ...(कोई नहीं जानता जब वो खुश होती है तो उसके भीतर एक आबिदा गुनगुना रही होती है ) नहर किनारे चलते चलते वो रास्ता यूं पार किया मानो...सुर्ख फूलों का कालीन और हरे खेतों की बिछी चादर.... फिर... [पूरी पोस्ट]
writer tanu sharma.joshi

रंग....

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[19 Mar 2010 16:36 PM]

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