अब कहां आएगा वो....
दिल्ली से प्रकाशित एक प्रमुख हिंदी दैनिक के नियमित स्तंभ---रंग ए जिंदगानी---में गुरुवार को प्रकाशित वजीर आगा की यह रचना मुझे अच्छी लगी, शायद आपको भी भाए। धूप के साथ गया, साथ निभाने वालाअब कहां आएगा वो, लौट के आने वाला।रेत पर छोड़ गया, नक्श हजारों...
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manglam
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[19 Mar 2010 15:58 PM]



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