भले ही रोमेंटिक मूड़ की ऐसी की तैसी हो गई पर मेरी छाती पर कोई बोझ नही बढा!
दो दिनों से अच्छा-खासा रोमेंटिक मूड़ मे चल रहा था कि आज अचानक़ एक एमरजेंसी मीटिंग आ गई।पुराने दिनो की खूबसूरत यादों के नख्लिस्तान मे चैन की बंसी बजाता देख शायद किसी को अच्छा नही लगा और उसकी नज़र क्या लगी एक बेहद कठीन परीक्षा से गुज़रना पड़ गया।मुझे आज मेडिकल...
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Anil Pusadkar
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[19 Mar 2010 15:48 PM]



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