मयखाने में अबे सुन बे गुलाब .......

मयखाना 'महाप्राण ' निराला ' की एक कविता है 'कुकुरमुत्ता '। हाल में चंडीगढ़ के रोज़ गार्डेन में ली गयी अपनी तस्वीरों को इस कविता के साथ छापने का लोभ संवरण नहीं कर पा रहा हूँ । इन तस्वीरों को आपने पिछली पोस्ट में देखा और सराहा है मग़र चाहता हूँ कि आप इन्हें फिर... [पूरी पोस्ट]
writer मुनीश ( munish )
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[19 Mar 2010 14:21 PM]

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