तनहाइयों का सिलसिला ये कैसा है
तनहाइयों का सिलसिला ये कैसा है गर वो मेरा है तो फासला ये कैसा है तुम न आओगे कभी ये मै जानती हूँ फिर तेरी यादो का काफिला ये कैसा है कभी नाचती थी खुशियाँ मेरे आंगन में अब उदासियों का मरहला ये कैसा है देख लूँ उसको तो दिल को सुकूं आये मुझे जान से प्यारा...
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[24 Feb 2010 07:40 AM]



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