बिजलियाँ हम पे गिराने कि जरूरत क्या थी
बे सबब अश्क बहाने की जरूरत क्या थी दर्दे दिल सबको दिखाने की जरूरत क्या थी हम तो खुद हार गए आपकी मोहोब्बत में जीत का जश्न मनाने की जरूरत क्या थी गर शिकारी थे तो करते शिकार कोई नया किसी घायल पर निशाने की जरूरत क्या थी इतने नाजुक हैं कि सांसो से पिघल जाते...
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[25 Feb 2010 06:07 AM]



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