जिंदगी फिर से गुनगुनाये तो अच्छा होता

धड़कन फांस ये दिल से निकल जाए तो अच्छा होता जिंदगी फिर से गुनगुनाये तो अच्छा होता     अब तो तनहाइयों की धूप से जलता है बदन प्यार की छांव जो मिल जाए तो अच्छा होता     तमाम शब गुजर गई ग़मों की दरिया में   तीर कश्ती को जो मिल जाए तो अच्छा... [पूरी पोस्ट]
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[05 Mar 2010 08:21 AM]

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