अश्क मुझे करते हैं परेशान बहुत

धड़कन तुम ही थे इश्क से अनजान बहुत   वरना इस दिल में थे अरमान बहुत     ज़ब्त ए गम आँख को पत्थर कर दे अश्क  करते हैं  परेशान बहुत   फिर से बह निकली मुहब्बत की हवा   पर वहाँ  जज़्ब हैं  तूफ़ान बहुत   जी तो लेती... [पूरी पोस्ट]
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[19 Mar 2010 05:13 AM]

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