दूरदर्शन के दिन

अपनी बात... तब दूरदर्शन के शुरूआती दिन थे। कुछ बड़े शहरों में ही टी.वी.टॉवर थे, लेकिन दूरदर्शन की ललक सब के मन में.... तब बहुत कम घर थे जहाँ टेलिविज़न था। हमारे घर भी तभी टैक्सला का बड़ा श्वेत-श्याम टीवी आया। कुछ दिखने के नाम पर केवल झिलमिलाहट और बीच-बीच में कभी... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना अवस्थी दुबे

यादें....

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[14 Jun 2009 07:40 AM]

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