आधुनिक पत्रकारिता- पीत या छदम पत्रकारिता
आज मैंने हिन्दुस्तान अखबार में रवीश कुमार का ब्लाग से सम्बन्धित लेख पढा। जिसमे उन्होने मनीषा पाण्डेय की बेदखली की डायरी का उल्लेख किया है। मनीषा की डायरी पढ़ने के बाद मुझे लगा कि वाकई में ब्लाग अपनी बातो को कहने का सशक्त माध्यम हो सकता है. वैसे मैं मनीषा...
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chandan
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[28 May 2008 10:39 AM]



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