ख्वाबों की मंजिल
कुछ अजीब सी चाहत है मेरी,जो पतझड़ देखे हैं,उन पत्तियों की शपथ है मेरी,दिल भी यही चाहता है, और यही है मेरे इबादत की ख्वाहिश,मेरे उम्र से हो छोटी,रास्तों की पैमाइश,हाँ मेरे पास वक़्त नहीं,कि मैं तेरे कालचक्र के साथ चलूँ,मुझे डर है कि मेरी धडकनें,न यूं ही...
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chandan
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[14 Mar 2010 10:07 AM]



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