मां
याद आता है मां का वो रोना,वो सुबकना,जब मेरा संघर्ष ढूंढता था,स्थायित्व का एक अदद कोना,उसके आंसुओं का,मजबूरी के यौगिकों से घुला होना,जो पिघला सकता था,परमेश्वर का भी सीना,उसे रंज था,कि वो न लायी थी,सामने वाले प्रोफ़ेसर साहब ने,जो दिया था,अपने बेटे को...
[पूरी पोस्ट]
chandan
11
0
0
0
0
[14 Mar 2010 10:09 AM]



Shuffle







