वो छुप-छुप के लिखना..........

अपनी बात... आज अपने बुक-शेल्फ की सफाई कर रही थी, तो एक पुरानी डायरी हाथ आ गई. सन १९८० की डायरी. यानि तीस साल पुरानी डायरी................. पन्ने पलटने लगी तो मेरा बचपन डायरी में से कूद कर बाहर भागा... याद आने लगे लेखन के शुरूआती दिन....हमारे घर में हमेशा से शुद्ध... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना अवस्थी दुबे
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[14 Mar 2010 22:02 PM]

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