इसे काट देना ही बेहतर रहेगा
इसे काट देना ही बेहतर रहेगायह रिश्तों का धागा उलझकर रहेगाजवाँ हो गयी है मेरे दिल कि कष्टीग़मों का कहीं तो समंदर रहेगाचली बदहवा, नींद शोलों की टूटीघरोंदा हमारा झुलसकर रहेगासितारें जहाँ टूटकर गिर चुके हैंउन्हीमें कहीं अपना रहबर रहेगाबिगडता है अक्सर ज़रा बनते...
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मिलिंद / Milind
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[19 Mar 2010 13:08 PM]



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