ग़ालिब : तीन शेर ..... एक ग़ज़ल
बचपन ही से कविताओं के शौक़ रहा .... हर तरह की कवितायें .... हिंदी भी अंग्रेज़ी भी ...... जितने कवियों / शायरों की रचनाएं पढ़ सका .. पढता रहा .... ये शौक़ कभी कम नहीं हुआ ... बल्कि वक़्त के साथ बढ़ता ही रहा ....फिर न जाने कब, कैसे कभी कभी कुछ कुछ लिखने भी लगा...
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अमिताभ मीत
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[19 Mar 2010 11:44 AM]



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