यह ठीक नहीं हो रहा नर्मदा माई
नर्मदा माई, प्रणाम। 12 मार्च को तुमसे मिलने घाट पर पहली बार आया था। तुमको लहराते देखकर बचपन याद आ गया। तब गांव की छठी मइया के पोखर में दादी के संग नहाने जाया करता था। दादी कहती थी- पहले इसमें कोई साबुन से नहीं नहाता था। इसी पानी से हमलोग दाल पकाते थे।...
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एम. अखलाक
नर्मदा
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[19 Mar 2010 07:50 AM]



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