उनकी आस्तीन में भी सांप पलते होंगे!(वयंग्य)(कविता)
जिस तरह मिलते है हम उनसे,उसी तरह वो भी हमसे मिलते होंगे!जैसे हमारी आस्तीन में पले हैं,उनकी आस्तीन में भी सांप पलते होंगे!हमे देखते ही खिल उठता है चेहरा उनका भी,हमारी बनावटी हंसी पर अन्दर ही अन्दर वो भी जलते होंगे!न तो रंज है कोई न गिला-शिकवा ही...
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kunwarji's
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[19 Mar 2010 09:36 AM]



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