पागल मन को संकल्पों से करता कितनी बार नियंत्रित....

कुछ शब्द इधर कुछ व्यस्त हूं, तब तक एक पुराना गीत पढ़िये और अपनी राय बताइये-पागल मन को संकल्पों से करता कितनी बार नियंत्रितजबकि तुम्हारी एक झलक ही मुझको फिर आतुर कर जातीबैठ झील के कभी किनारेछेड़ दिया जो वीणा का स्वरविश्वामित्र तपस्या भूलेभूल गये सब योग मछेंदरचितवन... [पूरी पोस्ट]
writer रविकांत पाण्डेय
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[19 Mar 2010 09:43 AM]

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