....तेरे प्यार की महिमा हैं.....अब पता चला किस काबिल हूँ मैं....
... सब यूँ देखते हैं जैसे कि कोई कातिल हूँ मैं .........तेरे प्यार की महिमा हैं....अब पता चला किस काबिल हूँ मैं.........तेरे गम के दो जाम लू तो कहते हैं शराबी हूँ मैं........तेरे प्यार की महिमा हैं....अब पता चला किस काबिल हूँ मैं........तेरी तस्वीर को...
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यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
मेरे भीतर का शायर
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[19 Mar 2010 08:45 AM]



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