सत्तू

मेरी कहानियां ......बेला जी की बिल्डिंग के पास खड़े -खड़े ग्यारह बज गया ,लगा अब वहनहीं आयेंगी .....या चली गयी होंगी ?कुछ देर बाद एक सवारी मिली उसकोफिल्म सिटी जाना था ....,एक पल को सोचा , ..क्या करूं ... जाऊं ....या ..मनाकर दूँ ......लेकिन ..यह कब तक ....... । तभी... [पूरी पोस्ट]
writer भंगार
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[19 Mar 2010 06:03 AM]

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