"मैं बेसब्री से सिनेमा के अंत की प्रतीक्षा कर रहा हूं"

दिल-ए-नादाँ जब मैं आलोचक था तब भी स्वयं को फिल्मकार मानता रहा। आज मैं स्वयं को आलोचक मानता हूं , एक प्रकार से हूं भी, बल्कि पहले से कहीं अधिक मुखर। अब मैं समीक्षा लिखने के बजाय फिल्म बनाता हूं, आलोचनात्मकता इसमें समा गई है। मैं खुद को एक एसा निबंधकार मानता हूं, जो... [पूरी पोस्ट]
writer संदीप पाण्डेय
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[19 Mar 2010 03:50 AM]

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