जानते सब हैं पर जागते नहीं

संवाद का सफर सन्तोष गुप्ताचूरू। देश का हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में उपभोक्ता है। उपभोक्ता होने के नाते उसके पास कुछ अधिकार भी हैं तो कत्र्तव्य भी। उपभोक्ता है कि वह सब जानता है पर फिर भी अपने अधिकारों के लिए जागता नहीं।सूचना एवं जनसंचार क्रांति के दौर में दुनिया के... [पूरी पोस्ट]
writer संतोष गुप्ता
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[18 Mar 2010 04:39 AM]

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