दाम्पत्य का आदर्श
दाम्पत्य का आदर्श (तुलसी कृत कवितावली से)जलको गये लक्खन हैं लरिका परिखौ पिय छाँह घरीक ह्वै ठाढे पोछि पसेऊ बयारि करौं अरु पाँय पखारिहौं भूभुरि डाढे तुलसी रघुबीर प्रिया स्रम जानिकै बैठि बिलम्ब लौ कंटक काढे जानकी नाह को नेह लख्यो पुल्क्यो तन बारि बिलोचन...
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भारतेंदु मिश्र
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[18 Mar 2010 23:40 PM]



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