‘‘रंग-बिरंगी तितली आई’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
तितली आई! तितली आई!! रंग-बिरंगी, तितली आई।। कितने सुन्दर पंख तुम्हारे। आँखों को लगते हैं प्यारे।। फूलों पर खुश हो मँडलाती। अपनी धुन में हो इठलाती।। जब आती बरसात सुहानी। पुरवा चलती है मस्तानी।। तब तुम अपनी चाल दिखाती। लहरा कर उड़ती बलखाती।। पर जल्दी ही थक...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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[19 Mar 2010 03:18 AM]



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