सच का आईना-पोस्टमार्टम रिपोर्टअज़ीज़ बर्नी
इस बार 100 वीं क़िस्त पूरी होने पर कोई आयोजन नहीं और 101वीं क़िस्त के लिए कोई नया शीर्षक भी नहीं। मुझे याद है कि ‘मुसलमानाने हिंद..... माज़ी, हाल और मुस्तक़बिल???’ फिर उसके बाद ‘दास्तान-ए-हिंद..... माज़ी, हाल और मुस्तक़बिल???’ की 100 क़िस्तें पूरी हो जाने के...
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Aziz Burney
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[19 Mar 2010 01:47 AM]



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