संकल्प
तुम चाहो तो जग में ज्वाला सुलगा दो, मैं स्वप्नों का संसार न मिटने दूँगी !तुम विप्लव का संगीत सुनाने आये, तुम पत्थर पर निज प्रीति लुटाने आये, तुमने मुकुलित सुमनों का यौवन देखा, तुमने उजड़े पादप का वैभव देखा ! तुम चाहे उपवन का सौरभ बिखरा दो, मैं कलियों का...
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Sadhana Vaid
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[18 Mar 2010 23:20 PM]



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