इस दुनिया में अपना कोई घर ना बने तो अच्छा है
इस दुनिया में अपना कोई घर ना बने तो अच्छा है ( आत्म - चिंतन)इस दुनिया में अपना कोई, घर ना बने तो अच्छा हैजो फक्कड़ बन घूम रहा है , वो ही साधू सच्चा हैये दुनिया परदेस है इसमें ,रहने कि क्यूँ ठान रहासभी पराया है इस जग का, जिसको अपना मान रहाये सपनों कि नगरी...
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योगेश स्वप्न
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[18 Mar 2010 22:27 PM]



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