अपने देश कि कला को बढ़ावा दें ......
मैं जिस बात का ज़िक्र आज कर रही हूँ वो न तो किसी विशेष personality से है और न ही किसी व्यक्ति विशेष से . बस एक ऐसा एहसास जो मुझे अक्सर होता है जब भी मैं किसी के अंदर कोई कला देखती हूँ और उसे अभावों कि ज़िन्दगी जीते हुए देखती हूँ . मैं ‘Sapna jain’, just...
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देवेश प्रताप
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[18 Mar 2010 22:20 PM]



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