दो अपना हाथ और अपना प्रेम दो मुझे

कवि कोकास नवरात्रि चतुर्थ दिवस  गाब्रीएला मिस्त्राल की  कविता 19.03.2010 । नवरात्रि के तीसरे दिन प्रकाशित अन्ना अख़्मातोवा की कविता पर अशोक कुमार पाण्डेय ने अपनी विशेष टिप्पणी में कहा अन्ना आख़्तामोवा की यह कविता एक सघन सांकेतिकता की कविता है। 'लक्ष्मण... [पूरी पोस्ट]
writer शरद कोकास

कविता

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[18 Mar 2010 22:18 PM]

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