कुछ यादें...
कुछ यादेंउन हसीं लम्हों कीअमानत होती हैंजब ज़मीन परचांदनी की चादर बिछ जाती हैफूल अपनी-अपनी भीनी-भीनी महक सेफ़िज़ा को रूमानी कर देते हैंहर सिम्त मुहब्बत का मौसमअंगराईयां लेने लगता हैपलकेंसुरूर से बोझल हो जाती हैंऔरदिल चाहता हैये वक़्त यहीं ठहर जाएएक पल मेंकई...
[पूरी पोस्ट]
फ़िरदौस ख़ान
नज़्म
20
3
0
3
3
[18 Mar 2010 22:11 PM]



Shuffle








