ख्वाब

बिखरे  मोती ख्वाब बुन दिया है मैंने रेत पर उँगलियों से कि रात भर तेरी खुशबू से महकती रही सहर होते ही देखा मैंने कि मेरी झोली तूने पारिजात से भर दी थी ...      ... [पूरी पोस्ट]
writer sangeeta swarup
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[13 Feb 2010 02:44 AM]

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