वजूद
वजूद के टुकड़े क्या बांटेंगी उदास शामें और ग़मज़दा रातें जिसने टुकड़े टुकड़े जोड़ कर ही बनाया हो वजूद अपना ....
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sangeeta swarup
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[11 Mar 2010 01:50 AM]



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