और मैं..... ...
छन छन्न छनमेरी पायल बोलती जाती और तुम मुदित हुए जाते होआँगन में अंगना बनी मैंडोल रही हूँपायल की झंकार रस घोल रही हैहक़ है मेरी पायलको बोलने का पर मुझे नहीं !!तुम क्यों मुझे बोलने दोगे पर होठ मेरे अब और प्रतीक्षा नहीं करेंगे ...
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'अदा'
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[18 Mar 2010 19:04 PM]



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