इत्ते भर से गा लूँगा

साहित्य-सहवास मैं तुझे गाना चाहता हूँगुनगुनाना चाहता हूँबस..........ज़रा कंठ सध जायेताल बैठ जायेसुर लग जायेऔरमूड बन जायेज़िन्दगी !ओ ज़िन्दगी !गीत हों न होंगीतकार का दर्द तो हैसंगीत हो न होसांस की झंकार तो हैमैं गा लूँगाइत्ते भर से गा लूँगाबस............ज़रा कंठ सध... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[18 Mar 2010 13:34 PM]

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