तेरी याद बहुत तड़पाती है ....
तेरी याद बहुत तड़पाती है,सीने में आग लगाती है।जब कोहरे छत पे टंगने लगे,तब धूप कहाँ रह जाती है,वह घूंघट में छिप जाती है, सजनी की याद दिलाती है। तेरी याद बहुत तड़पाती है।वर्षा जब बरसे वर्षों तक, तब ये तन्हाई क्या गाती है,गा - गा के मुझे सताती है, सपनो से...
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Nihar Khan
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[18 Mar 2010 12:01 PM]



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