सपनो के शहर मुंबई में सच होता एक सपना
आज Mumbai Mirror (लोकल अखबार) में एक खबर पढ़ी तो सोचा आप सब से बाँट लूँ. आजकल अखबारों में हत्या,लूटपाट,धोखा धडी की ख़बरों से ऐसा पटा होता है कि ऐसी कोई खबर पढो तो लगता है हाँ ज़िन्दगी सांस ले रही है. उम्मीद मिटी नहीं है.ईमानदारी, मानवता सब इस दुनिया में...
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rashmi ravija
मुंबई
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[18 Mar 2010 12:06 PM]



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