बाज़ी दर बाज़ी

गीत............... जिंदगी की बिसात पर रिश्तों की बाज़ी लगी होती है हर रिश्ता अपनी अहमियत लिए होता है खड़ा आमने सामने .कोई प्यादा तो कोई वजीर सब चलते रहते हैं अपनी चालें आड़ी - तिरछी एक दूसरे को शह और मात देने की होड़ में और जब मिल जाती है किसी रिश्ते को मात तो मन भर जाता है... [पूरी पोस्ट]
writer sangeeta swarup
views
29
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
18
[18 Mar 2010 10:38 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix