अंत क्या होगा.. फ़िक्र नहीं

दफ़ा-512 किसी ने कहा- लक्ष्य पर नज़र है, कभी मील पत्थर नहीं देखा इन आँखों ने.. मैं कहता हूँ- मील के पत्थरों ने ही हौसला बढ़ाया है, इन पत्थरों ने ही चलना सिखाया है,हर मील का पत्थर एक लक्ष्य है मेरे लिए..जिन्दगी का अंत क्या होगा.. फ़िक्र नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer आमीन
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[18 Mar 2010 09:25 AM]

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