कैसे समझाएंगे भावी पीढ़ी को

उदभावना दुर्गेश मिश्राघर बैठे मैं एक दिन टीवी पर धारावाहिक झांसी की रानी देख रहा था। उसमें बार बार बनारस, बिठूर और कानपुर का नाम आ रहा था। वैसे तो हमें टीवी देखने का समय ही नहीं मिलता, क्यों कि अखबारी लाइन ही कुछ एसी है। बिल्कुल संडिला की लड्डू की तरह बंद हांडी,... [पूरी पोस्ट]
writer pankaj mishra

महमान

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[18 Mar 2010 06:54 AM]

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