मइय्यत से पेज थ्री तक ‘मेकअप वाली भठियारन’
(मैडम को भठियारन का टाइटिल इसलिए दिया जा रहा है। क्योंकि एक रसूख युक्त खानदान में जन्म लेने के बाद भी वो अपने जीवन में सिर्फ भाड़ ही झोंक पाईं थी। वो इंसान का रक्त चूस कर उस रक्त को भाड़ में घासलेट की तरह इस्तेमाल किया करती थीं।) मइय्यत थी, तो याद आया...
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anupam mishra
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[18 Mar 2010 06:56 AM]



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