माला की माया- हास्य कविता
माला की माया नेऐसा बवंडर मचायाहर सांसद क्याआम जन भी चिल्लायाचौंधिया गईं आंखेंकैमरों की भीदेखते ही माला की चमकपास में होते तोशायद पकडते लपकफ़टी की फ़टी आंखें औरमुंह में पानी भर आयामाला की माया नेऐसा रंग दिखायाकि हर कोई ललचायादूर ही के दर्शन सेमैं बेहोश हो...
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सीमा सचदेव
कविता
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[18 Mar 2010 04:53 AM]



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