हमें तो बस अपना फ़र्ज़ याद रहता है! अज़ीज़ बर्नी
कुछ दाग़ थे मेरी क़ौम के दामन पर जिन्हें छुड़ाना बहुत ज़रूरी था। बात सिर्फ मुसलमानों की नहीं थी, बात मेरे देश भारत के हित व कल्याण की थी। लोकतांत्रिक मूल्यों की सुरक्षा की थी, साम्प्रदायिक सदभाव, एकता व भाईचारे की थी। इसलिए कि जिस नफरत की आग में हम पिछले 61...
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Aziz Burney
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[18 Mar 2010 04:03 AM]



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