सत्तू

मेरी कहानियां .....मैं अपने आप से , बार -बार पूछने लगा ,जो कुछ मैं कर रहा हूँइसका अंजाम क्या होगा ?........क्या मैं गुनाह की चादर ओढ़ रहा हूँ ?इसी उधेड़ -बुन में बैठा रहा ........कुछ सोच के, नोट जो अभी निकाले थे ,दुबारा उसी झोले में रख दिया ......और आँखे बंद कर के सोने... [पूरी पोस्ट]
writer भंगार
views
15
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[18 Mar 2010 03:44 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix