भाई

मेरी बतियाँ तुम अगर होतेतो शायद झगड़कर घुन्ना बने बैठे होतेहम एक दूसरे सेलेकिन तुम मर चुके बरसों पहलेऔर मेरे लिए तुम अब बस एक विषय रह गए होक्या कुछ और भी संभव थाजबकि न मैं तुमसे कभी मिलान देखा तुम्हें?मुझे तो अट्ठारहवें जन्मदिन परउपहार की तरह दी गईतुम्हारे होने और... [पूरी पोस्ट]
writer महेन
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[14 Mar 2010 09:57 AM]

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